झुटा पेशवा : झुटा ज्ञानबा : मुग़ल बादशाह को जुते पहनाने वाले दरबारी नौकर को मुग़ल लोग पेशवा कहते थे जो रोज बादशाह के जुते उतारते थे , पहनाते थे। शिवाजी महाराज ने शुर सरदारों का अष्ट प्रधान मंडल बनाया था जो सभी तन्खा पाते थे। पेशवा का काम था महाराज के जुते की रखवाली , पहनना , उतरना। इस से ज्यादा कुछ नहीं। यह नाम उन्हों ने मुग़ल , फ़ारसी से लिया था। प्रधान मंत्री को वजीर कहा जाता है। सेनापति को सिपाह सालार ! अष्ट प्रधान में पेशवा की कोई हैसियत हो ही नहीं सकती। ये तो वैसा ही हुवा जैसे ज्ञानबा की मेख यानि बढ़ा चढ़ा कर बताना जैसे ज्ञानबा को बताया गया था। गीता का अनुवाद किसी और ने किया था मराठी में उसका परायण कहा जाता है ज्ञानबा किसी मंदिर में करते थे जिस में कोई मूल भारतीय आता जाता नहीं था या गैर ब्राह्मण लोगो को अनादर आना मना था। ऊपर से ऐसे जुट गड़े गए जैसे ज्ञानबा ने दिवार चलायी , पेट की गर्मी से दोसे पकाये ,भैसे से वेद कहलावे। ये सब ज्ञानबा की मेख यानि झुट है। वैसे ही पेशवा कोई बड़ा नौकर था ये भी झुट है। विदेशी ब्राह्मण ...
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९ अगस्त , २०१८ , विश्व नेटिव दिवस जलावोगे तो राख बनूँगा दफनावोगे तो खाक बनूँगा फेंकोगे गर कूड़े में मुझे तो नेटिविसम की खाद बनूँगा ! चाहे राख बनु या खाक बनु उपजावु आग होगी मेरी अंगारो पे चला जला हूँ मैं फीनिक्स सी उडान है मेरी। नेटिविज़्म की ज्योत है ये सूरज से भी तेज आभा होगी जहा ना रवि, कवी पुहचेगा वो हर दर, मेरा दर होगा। अलख जगाई नेटिविज़्म की मैं मिटूंगा पर नहीं मिटेगा ये विश्व में जहा मानव होगा मै नेटिव अब ये नारा होगा। नेटिविस्ट राउत का जन्मदिन नेटिविस्ट दिवस माना जाएगा ९ अगस्त से २४ अगस्त अब विश्व नेटिविज़्म पखवारा होगा। #जनसेनानी #Jansenani कल्याण ९ अगस्त , २०१८ , #विश्व_नेटिव_दिवस
Nativist D.D.Raut : life and Work Born to serve Native People : Nativist D.D.Raut whose full name is Daulat Domaji Raut is born on 24 August ,1948 at Pauni , Dist : Bhandara , Maharashtra State , India . He is the sixth sibling having five elder brothers and two younger sisters . His father’s name is Domaji Lahuji Raut and mother ’s name Krishnabai . His father was a businessman and trader of rice and gul . He was the only son to his parents Lahuji and Parvatabai . Lahuji was noted pahelwan of his time in the vicinity . However he died in young age living Domaji as a child in the care of his laborious mother who started rice milling at home and selling finished product in market . Domaji too followed his father’s liking for deshi kusti and in his youth he used to play kusti in nearby villages and towns . As was the custom in those days he was married to Krishnabai younger daughter of Motghare , a farmer and Kotwal of Sindhapuri a village...
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